व्यावसायिक सीक्षा से कौशल और प्रतिभा का बीकास !

व्यावसायिक कौशल अकादमिक सीक्षा से भीन्न हैं। यहाँ हि ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण पर अधिक जोर देते हैं जो छात्रों को व्यावहारिक चुनौतियों और कार्य स्थितियों से निपटने मैं मदद करते हैं। कौशल कार्यक्रम केवल कौशल पर जोर देते हैं। हालााँकी स्कूलो मैं किये जाने वाले व्यावसायिक पाठ्यक्रम मैं हि व्यावहारिक कौशल के साथ- साथ अंतर्निहित सैंद्धांतिक ज्ञान पर भी जोर देते हैं। हमारा ध्यान 21वीां सदी मैं तेजी से बदलते कार्यस्थल मैं सफल होने के लिए आवश्यक कौशल पर भी है। इनमे सांचार कौशल, डीजीटल और बितीय साक्षरता और उद्यमिता शामिल हैं।

व्यावहारिक और कौशल सीखने पर यह जोर छात्रों को वास्तबीक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने और अपनी आजीबिका कमाने के लिए जबरदस्त आत्मबीश्वास देता है। यहाँ हम पांजाब के अपने कुछ सीक्षकोां और छात्रों के अनुभब साझा करना चाहेंगे। हमारे लिए, इन कार्यक्रमों की आवश्यकता और हमारे छात्रों की जीवन यात्रा पर इसके प्रभाब के बारे मैं उनकी कहायनिोां से अधिक स्पस्टता से कुछ भी नहीं बताया गया है। यहाँ उनमे से कुछ हैं, उनकी आवाज मैं और हमारे भावुक सीक्सोको के प्रतिबिम्ब के माध्यम से।

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https://laqsh.com/wp-content/uploads/2023/12/Madhya-Pradesh-Electronics-Magazine-June-2023.pdf

“ रास्ते चलने से बनती हैं ”

यह कहानी है ऋषि ढीमर की पिता-श्री हरिलाल ढीमर, ग्राम- छीरहटी, तहसील-बुढ़ार, जीला- शहडोल (म.प्र.)। ऋषि शास. उत्कृस्ट विद्यालय बुढ़ार मैं कक्षा 10वीां का छात्र हैI ऋषिको एलेक्ट्रॉनिस के क्षेत् मैं रूची होने के कारण ऊसने कक्षा 9वीां मैं व्यावसायिक सीक्षा योजना के अन्तर्गत चल रहे व्यावसायिक पाठ्यक्रम एलेक्ट्रॉनिस & हार्डवेयर ट्रेड का चुनाव किया था, जिसमे ऊसने एलेक्ट्रॉनिस & हार्डवेयर से जुड़े बिविन्न प्रकार के उपकरणो को सुधरना एवां मरम्मत करना सीखा और बहुत से उपकरण जैसे लईड बल्ब, प्रेस, पांखा, घरेलू वायरिंग, इलेक्ट्रिक बल्ब, मिक्सर, आर. ओ. वाटर प्यूरीफािर की आदी बिभीन्न उपकरणोां को सुधारने आने लगा।

ये सब व्यवसायिक सीक्षा के कारण ही सम्वब हो पाया। जीसका श्रेय विद्यालय मैं पदस्थ व्यावसायिक प्रसीक्षक श्री राहुल कोरी सर को जाता है। जिन्होंने ऋषि का उत्साह बढ़ाया और निरंतर नए-नए उपकरणोां को सुधरने मैं मदद की और सर के द्वारा विद्यालय मैं लगे इलेक्ट्रिक पंखा, बोर्ड जैसे उपकरणोां के फाल्ट को पहचानना और उन्हें बनाने मैं मदद मिली और आज वह अपने गाांव के घरों के बिभिन्न घरेलू उपकरणोां को सुधारकर परीवार की आर्थिक स्थ ति को सुधरने मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे ऊसके और ऊसके परीवार का खर्च निकल जाता है और वह इस तरह परीरवार की जीबिकउपार्जन मैं मदद कर रहा है। ऋषिको पूछे जाने पर बताया-’व्यवसायिक सीक्षा ने मेंरी पूरी तरह से सहायता की। हमारे विद्यालय की प्राचार्या श्रीमति रेवा रानी पांडेय मैडम जी का बहुत आवरि हूँ। जो नीरांतर हमारा उत्साहवर्धन करती रहीं हैं, और आज मैं अपने परीवार के लीए आर्थिक मदद कर रहा हूँ व्यवसायिक शिक्षा मेरे जीवन का अविन्न अंग बन कर मेंरे जीवन को आगे बढ़ा रही हैI ’

It’s not always easy, but it’s worth it !!

This is the story of two brothers, Vijendra Marko and Aman Marko, who belong to a small village Umaria, (Mandla) where despite the problems of electricity, road, and water these brothers have done what will be an inspiration for all. Vijendra and Aman are cousin brothers, Vijendra’s father(Pancham Singh marko) is a farmer by profession and has been a guest teacher in the past, and Aman’s elder brother (Dilip Marko) has a shop for repairing electronics in Bakori.

Both these students passed 8th class first division from village Umaria and took admission in CM RISE secondary school, Sagar in 9th class, then they came to know that there is electronics & hardware trade in their school. They had some knowledge about electronics and when they told their fathers about this course, their fathers were very happy and suggested that they enroll for it. Over time, these two brothers went to school and learnt a lot about mixers, wiring of the house, wiring of the stairs, opening a fan motor, changing bearings, making projects etc. Everyday before and after school they also went to Aman’s brother’s shop to practice. Every Sunday they sat in the shop and also went home to home to repair coolers , changed switches, regulators, capacitors etc and earn up to Rs 5,000 monthly. It seems as if their eagerness to learn is increasing day by day. Seeing them, other students of the school are also inspired. Both Vijendra and Aman are among the promising students of the school. The teachers of the school are also impressed, the Principal sir always praises these children. These brothers have decided to pursue electrical engineering in future.

मेहनत करके सफलता की उंचाईआं छुयों !!

हम आपको शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आरम्भा के 10वी कक्षा मैं पड़ने वाले एक असधारण छात्र सागर नगपुरे से मिलवाते हुए रोमंचित हैं, जिन्होंने विकास और सफलता की एक उल्लेखनिय यात्रा शुरू की है। सागर की शैक्षणिक यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने 9वीां कक्षा मैं व्यावसायिक ट्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर विषय चुना, सागरने इस विषय को दोसाल कक्षा 10 वी तक पड़कर इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स के काांसेप्ट को समझा। उन्हें धीरे- धीरे घरेलु उपकरणोां जैसे – पंखा, कूलर, मिक्सर, बिद्युत मोटर इत्यादी की मरमत आने लगा। अब सागर नगपुरे अपने गाव में स्थित इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान “ ड़ोहरे इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स आरम्भा“ में विद्युत सामग्री को सुधरने का कार्य करता है।

और उससे महीने का लगभग 3000 रूपया अर्जित कर लेता है। अब सागर 11वीं कक्षा में जीव विज्ञान की पढ़ाई कर रहा है। वह कह रहा है की इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर की पढ़ाई करने के बाद उसे इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत रूचि है, लेकिन दुर्भाग्य से उनके गाांव में ऐसी कोई सुविधा नहीं है इसलिए वह अपने सपने को पूरा करने के लिए 11वीं के बाद आईटीआई करने की सोच रहा हैं।

” सुरु करने का सही समय अभी है”

यह कहानी है शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामपुर (जुन्नारदेव) जीला छिंदवाड़ा मैं पढ़ने वाले छात्र दक्ष साहू की, जीनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, माँ सीलाई इत्यादी का कार्य करके आय अर्जित करती हैं। दक्ष ने कक्षा नवमी मैं व्यावसायिक विषय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर लेकर अपनी पढाई प्रारम्भ की और फिर कहावत है की जीसके पास हुनर है उसे रोजगार की कमी नहीं, ठीक ऐसा ही हुआ दक्ष के साथ। दक्ष छत के पंखे, टेबल वाले पंखो के कंडेंसर बदलना, सोल्डर करना, मल्टीमीटर का सही तरीके से उपयोग करना इत्यादि सीखे, उन्होंने खराब इलेक्ट्रॉनिक तौल काँटों मैं डायोड, प्रतिरोध, बैटरी बदलने जैसे कार्य को प्रारम्भ किया और अब वह बर्तमान मैं घरेलू मरम्मत कर लेता है।

अब वह 10वीां कक्षा में पढ़ रहा है, पढ़ाई के साथ वह हर रविवार को पास की ऐक इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान पर काम करने जाता है और हर बार 100 से 200 रुपए कमा लेता हैं।दक्ष जो कुछ भी कर रहा हैं उससे उनका परीवार बहुत खुश है। उनके माता पिता की इच्छा है की दक्ष अपनी स्वयं की इलेक्ट्रॉनिक्स तौल कांटे की दुकान खोले, जिसमे वह उन्हें सुधरने और मरम्मत सम्बन्धी कार्य करे। पढाई उपरांत दक्ष इसके लिए क्रियाशील रहेंगे, वर्तमान मैं वह इन कार्यो मैं और भी दक्षता हासिल कर रहे हैं। उनका कहना है की व्यावसायिक विषय से वह कौशल सम्बन्धी निपूर्णता मैं परीपक्व हुए है।

” STORY OF SUCCESS “

Himanshu Srivastav has found his way to his dream career through Electronics & Hardware course. After doing electronics and hardware course, Himanshu got a chance to do job training for 20 days . In which he got to learn many things like repairing Electronics & Electrical Home Appliances and got job opportunities in various companies. Today he is working at a nearby local shop named ‘Sai electricals and electronics’ where he is repairing electronics and electrical equipment like geyser, microwave, oven, ro water purifier and all other home appliances.

Himanshu is earning nearly Rs 6000 to 7000 per month by working there. When Himanshu was asked about his experience, he happily said’ I would like to thank my vocational teacher Arun Kumar Choudhary and I would also like to tell all the students that you can make your dreams come true by taking admission in Electronics and Hardware, just like I did.’ His love and passion for electronics and hardware course has helped him to reach where he is today. Now Himanshu has successfully passed 12th class .He wishes to study more, he wishes to grow more in electronics field. He aims not only to earn more money, but also to build a career that will bring him joy and satisfaction.

संकट के क्षणों को नई सुरुआत के क्षणों में बदलो !!

छात्र हर्ष साहू वह सीहोरा का रहने वाला है। हर्ष साहू ने 9th क्लास में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर विषय का चयन किया क्योंकि उसकी इलेक्ट्रॉनिक्स में बिसेस रूचि थी। उसने बताया की उसका सपना इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर बनना है। उसकी पारिवारिक स्थिती ठीक नहीं है, घर में उसके पिता जी 2 वर्ष पहले कोरोना काल में गुजर चुके है जीससे परीवार में आर्थिक स्थिती खराब है। घर का बड़ालड़का होने के कारण अब हर्ष के ऊपर पूरी जीम्मेदारी आ चुकी है, क्योकी परीवार में माँ पढ़ी लीखी नहीं है और वह एक हाउस वाइफ़ है। इसलीए अब घर की स्थिती सुधरने की जीम्मेदारी हर्ष पे आ गई है।

इसके कारण वह अपने करियर में ज्यादा ध्यान दे रहा और यह उसकी एक मजबूरी भी बन चुकी है इसलीए उसे घर में जब भी फ्री टाइम मिलता था वह इलेक्ट्रॉनिक्स सम्बन्धी ऑनलाइन वीडियो देखता रहता था और कुछ न कुछ सीखता रहता है। हर्ष साहू अधिकांश समय विद्यालय में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक्स लेब में रहता था और वह कुछ न कुछ पूछता रहता था। इलेक्ट्रॉनिक्स में रहते हुए उसने लाइट बोर्ड बनाना, गीजर, जूसर, आरो, सीरीज टेस्टिंग ,और छोटा मोटा काम सुधारना आने लगा। वह स्कूल में लगे पंखे को भी सुधर लेता है और उसने वह कार्य विद्यालय की लेब में किया भी है। इस कार्य के लिए उसे प्राचार्य द्वारा सम्मानित भी किया गया है। हर्ष साहू ने कुछ पेसे जोड़कर अपनी एक इलेक्ट्रॉनिक्स की छोटी सी दुकान खोला है जीसका नाम राकेश इलेक्ट्रॉनिक्स है, जीससे वह कुछ पेसे कमा लेता है। धीरे धीरे वह अपनी दुकान को बड़ी कर लेगा जीससे उसकी अच्छी कमाई होगी, जीससे वह अपना और परीवार का भरण पोषण कर सकता है । हर्ष की यात्रा हमें याद दीलाती है की नए अवसरों को अपनाने और अपने जुनून का पालन करने से आश्चर्यजनक बदलाव आ सकते हैं। उनका कहानी एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करती है की अच्छी तरह से बताई गई कहानियां बड़े संकट के क्षणों को नई शुरुआत के क्षणों बदलने की क्षमता रखती हैं।

सपनो को साकार करने की ओैर कदम बढ़ाओ

यह कहानी है शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आरम्भा के 10वी कक्षा में पड़ने वाले सुभम सिंह सोलांकी की जिन्होंने विकास और सफलता की एक अद्वुत यात्रा शुरू की है। बचपन से ही खुशदीप अपने साथियों से अलग थे, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया प्रति आकर्षित थे। उन्होंने कक्षा 9वी में व्यावसायिक ट्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर विषय को चुना तथा इस विषय को दो साल कक्षा 10 वी तक पड़कर इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स के काांसेप्ट को समझा।

तथा अब सुभम सिंह सोलांकी अपने पिताजी की इलेक्ट्रिकल दुकान “ सोलांकी इलेक्ट्रिकल्स मोहड़ी” में घरेलु उपकरणो जैसे – पंखा, कूलर, मिक्सर, बिदूत मोटर इत्यादी की मरमत करता है । तथा उससे आय अर्जित करता है। सुभम व्यावसायिक ट्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर विषय को पड़कर तथा इलेक्ट्रिकल के कार्य को करके बहुत खुस है। और ईसी की दुनिया में अपना करियर जारी रखना चाहते हैं। हम सुभम के जुनून और दृढ़ सांकल्प की प्रसंसा करते हैं।

मेहनत का फल !!

विद्यार्थी का नाि हनी रजक है। हनी ने 2०२२ में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर विषय को कक्षा 9 में चुनाव किया, जब हनी को यह जानकारी दी गई की वह हिंदी विषय को छोड़कर इस विषय को ले सकता है और इस विषय के बारे में जब उसे बताया गया तब उसकी रूची इस विषय में बहुत थी|हनी रजक ने कक्षा 9वी में इसका अच्छे से अध्धयन किआ जीससे उसने बहुत सारी चीजोां का प्रैक्टिकल अध्धयन किआ। इसके पश्चात हनी गर्मियों की छुट्टी में इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप में जाकर काम करता है, जीससे उसने इलेक्ट्रिकल के छोटे- मोटे काम करने शुरू किआ और आज की स्थिति में यह काम उसकी आजीविका का कारण है।

छुटियों के दिनों में फिटिंग और कूलर इत्यादि कामो से लगभग 5 से 10 हजार महीना वह कमा लेता है। वह अपने घर में एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक्स की शॉप खोला है, धीरे धीरे वह उस शॉप को अपनी कमाई से बड़ा करता जा रहा है जीससे उसकी अच्छी कमाई हो रही है। उसके परीवार बहुत खुस् है हनी की इस रूचि को देखकर। हम हनी को इस सफलता के लिए बधाई देते है। उनकी कहानी हमे याद दीलाती है की अपने हितो को आगे बढ़ाने से करियर के अवसर पूरे हो सकते हैं और ब्यक्तिगत विकास हो सकता है।

“ if there is passion there is success “

Mohit Singh currently is a student of class 11th in GHSS, Bhatanwara, district Satna. He was one of the students of batch 2021-22 who had taken electronics and hardware. With the help of this course he has learned a lot related to maintenance and repairing of electronics and electrical equipment like geyser, microwave, oven, RO water purifier and all other home appliances. He is now very well prepared for doing a job or to start a small business, even he has started doing a part time job in a local electronics repairing shop along with his studies.

He is now financially independent and also helping his family. This is, possible only with the help of electronics and hardware course. This course has made the students aware of all the electrical equipment. So this is one of the stories, there are so many more such students who are getting benefited with the help of electronics and hardware course.
Here are some pictures showing the glimpse of him doing a job in a local shop.

“सपना सिर्फ देखो नही उसे पूरा भी करो “

यह कहानी है शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय आरम्भा के 10वी कक्षा में पड़ने वाले युग कुमार लिल्हारे की जीसने कक्षा 9वी में व्यावसायिक ट्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर विषय को चुना तथा इस विषय को दो साल कक्षा 10 वी तक पड़कर इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स के काांसेप्ट को समझा। तथा अब युग कुमार लिल्हारे अपने पिताजी की कीराना दुकान “ लिल्हारे कीराना भंडार ” में कीराना के साथ विद्युत सामग्री को सुधरने का कार्य प्रारम्भ किया। घरेलु उपकरणोां जैसे – पंखा, कूलर , मिक्सर , विद्युत् मोटर इत्यादी की मरमत करता है और एक हफ्ते के लिए 500 से 600 कमा लेते हैं इससे खुदका और पढ़ाई का खर्च निकल जाता है।

अब वह आईटीआई की पढ़ाई कर रहा है युग कहता है की व्यावसायिक शिक्षा ने उसे आईटीआई पढ़ने के लिए प्रेरित किआ अब वह इस क्षेत् मे अपना सफर जारी रखना चाहते हैं । युग कुमार के अनुसार एक छात्र को व्यावसायिक शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए क्योंकि इसमें नौकरी के कई अवसर हैं अन्यथा वहां से आप जो कुछ भी सीखते हैं उससे आप हमेशा अपना खुद का व्यबसाय शुरू कर सकते हैं। व्यावसायिक शिक्षा एक अत्यंत महत्यपूर्ण विषय है ।